वद् (भ्वा० पर० वदति, परन्तु कुछ अर्थों में तथा कुछ उपसर्गों के साथ आ०, दे० नी०, उदित, कर्म वा० उद्यते, इच्छा० विवदिषति)
1. कहना, बोलना, उच्चारण करना, संबोधित करना, बातें करना –वदप्रदोषे स्फुटचन्द्रतारका विभावरी यद्यरुणाय कल्पते –कु० ५।४४, वदतां वरः–रघु० १।५९, 'वाक्पटुओं में प्रमुखतम'
2..घोषणा करना, कहना, समाचार देना, सूचित करना– यो गोत्रादि वदति स्वयम्
3. किसी के विषय में कहना, वर्णन करना, –भग० २।२९
4. अंकित करना, निर्धारित करना, बयान –मनु० २।९, ४।१४
5. नाम लेना, पुकारना –वदन्ति वर्ण्यावर्ण्यानां धर्मैक्यं दीपकं बुधा: –चन्द्रा०
6. संकेत करना, आभास देना –कृतज्ञतामस्य वदन्ति संपद:–कि० १।१४
7. स्वर ऊँचा उठाना, क्रन्दन करना, गायन करना –कोकिल: पंचमेन वदति, वदन्ति मधुरा वाच: –आदि
8. होशियारी या प्रवीणता दर्शाना, किसी विषय पर अधिकारी होना (आ०) शास्त्रे वदते, पाणिनिर्वदते –वोप०
9. चमकना, उज्ज्वल या देदीप्यमान दिखलाई देना (आ०), –भट्टि० ८।२७
10. उद्योग करना, चेष्टा करना, परिश्रम करना (आ०) क्षेत्रे वदते –सिद्धा०, प्रेर० (वादयति–ते)
1. कहलवाना
2. शब्द करवाना, बाजा बजना –वीणामिव वादयन्ती –विक्रम० १।१०, वादयते मृदु वेणुम् –गीत० ५,
अनु–
1. बोलने में नकल करना, दोहराना –(गिरं नः) अनुवदति शुकस्ते मञ्जुवाक्पञ्जरस्थः –रघु० ५।७४
2. प्रतिध्वनि करना, गूंजना (पर० और आ०) अनुवदति वीणा
3. अनुमोदन करना (उसी मनोभाव की प्रतिध्वनि करके) शि० २।६७
4. नक़ल करना (आ०) भट्टि० ८।२९
5. समर्थन के रूप में आवृत्ति करना,
अप–
(सदैव आ०, परन्तु कभी कभी पर० भी)
1. बुरा भला कहना, गाली देना, निन्दा करना –शि० १७।१९, मनु० ४।२३६, कभी कभी संप्र० के साथ –भट्टि० ८।४५,
2. न अपनाना,
3. गिनना विरोध करना,
अभि–
1. अभिव्यक्त करना, उच्चारण करना, मूल्य या वजन रखना –यद्वाचाऽनभ्युदितं येन वागभ्युद्यते, तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते –केन०,
2. नमस्कार करना, अभिवादन करना, (प्रेर०) प्रणाम करना –भगवन्नभिवादये,
उप–
(आ०)
1. लुभाना, चापलूसी करना, फुसलाना –भट्टि० ८।२८,
2. मनाना, अनुकूल करना,
परि–
गाली देना, निन्दा करना, बुरा भला कहना,
प्र–
1. बोलना, उच्चारण करना
2. बातें करना, संबोधित करना –भट्टि० ७।२४
3. नाम लेना, पुकारना
4. खयाल करना, सोचना,
प्रति–
उत्तर में बोलना, जवाब देना–रघु० ३।६४
2. बोलना, उच्चारण करना
3. दोहराना
वि–
(आ०)
1. झगड़ा करना, विवाद करना –परस्परं विवदमानौ भ्रातरौ
2. भिन्नमत का होना, प्रतिकूल होना, विरोधी होना –परस्परं विवदमानानां शास्त्राणां –हि० १
3. (न्यायालय आदि में) दृढ़ता पूर्वक कहना, –
विप्र–
(पर० आ०) बादविवाद करना, कलह करना, झगड़ा करना –भट्टि० ८।४२,
विसम्–
1. असंगत होना, भिन्न मत का होना
2. असफल होना (प्रेर०) असंगत बनाना
सम्–
1. बातें करना, संबोधित करना
2. मिलकर बोलना, वार्तालाप करना, प्रवचन करना
3. समरूप होना, अनुरूप होना, समान होना (करण० के साथ) –अस्य मुखं सीताया मुखचन्द्रेण संवदत्येव –उत्तर० ४
4. नाम लेना, पुकारना
5. बोलना, उच्चारण करना (प्रेर०)
1. परामर्श करना, सलाह –मशवरा (करण० के साथ) करना
2. शब्द करवाना, वाद्ययंत्र बजाना,
संप्र–
(आ०) (मनुष्यों की तरह) ऊँचे स्वर से या स्पष्ट बोलना –संप्रवदन्ते ब्राह्मणाः –सिद्धा०
2. क्रन्दन करना, क्रन्दन ध्वनि का उच्चारण करना (पर०) –वरतनु संप्रवदन्ति कुक्कुटाः महा० ।