संस्कृत-शब्दकोशः

वप्तृ वप्रा

वप्र

वप्र (पुं०, नपुं०) [उप्यते अत्र वप्+रन्]


दुर्गप्राचीर, मिट्टी की दीवार, गारे की भित्ति –वेलावप्रवलयां (ऊर्वीम्) रघु० १।३०
2. तटबंध या टीला (जिसमें कि साँड या हाथी टक्कर लगाते हैं) रघु०१३।४७, दे० नी० वप्रक्रीड़ा
3. किसी पहाड़ या चट्टान का ढलान –बृहच्छिलावप्रघनेन वक्षसा –कि० १४।४०
4. चोटी, शिखर, अधित्यका –तीव्रं महाव्रतमिवात्र चरन्ति वप्राः –शि० ४।५८, ३।३७, कि० ५।३६, ६।७
5. नदीतट, पार्श्व, किनारा, वेलातट, –ध्वनयः प्रतेनुरनुवप्रनपाम् –कि० ६।४, ७।११, १७।५८
6. किसी भवन की नींव
7. शहरपनाह या दुर्गप्राचीर से युक्त नगर का फाटक
8. खाई
9. वृत्त का व्यास
10. खेत
11. मिट्टी का टीला (जिसको कि हाथी या साँड टक्कर मारे)=
~प्र:
पिता,
~प्रम्
सीसा ।
समस्त पद
~अभिघातः
(किसी पहाड़ या नदी आदि के) तटबंध पर टक्कर मारना –कि० ५।४२, तु० 'तटाघात'
~क्रिया, ~क्रीड़ा
किसी टीले या तटबन्ध पर हाथी (या साँड़) का टक्कर मार कर विहार करना –वप्रक्रियामक्षवतस्तटेषु –रघु० ५।४४, वप्रक्रीड़ापरिणत गजप्रेक्षणीयं ददर्श– मेघ० २ ।


वप्रः [वप्+रन्]


1. फसील, परिवार, परकोटा
2. ढलान
3. समुच्चय
4. भवन की नींव ।

परिशिष्ट


वप्रम् [वप्+रन्]


1. फसील, परिवार, परकोटा
2. ढलान
3. समुच्चय
4. भवन की नींव ।

परिशिष्ट



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