वराहः [वराय अभीष्टाय मुस्तादिलाभाय आहन्ति भूमिन्–आ+हन्+ड]
सूअर, बधिया किया गया सूअर,–विस्रब्धं क्रियतां वराहततिभिर्भुस्ताक्षतिः पल्वले –श० २।६
2. मेंढ़ा
3. बैल
4. बादल
5. मगरमच्छ
6. शूकराकृति में बना सैनिक व्यूह
7. विष्णु का तीसरा वराह–अवतार–तु०
“वसति दशनशिखरे घरणी तव लग्ना शशिनि कलङ्क कलेव निमग्ना ।
केशव घृतशूकररूप जय जगदीश हरे ॥”
–गीत० १
8. एक विशेष माप
9. वराहमिहिर का नामान्तर
10. अठारह पुराणों में से एक ।
समस्त पद
~अवतारः
विष्णु का तीसरा अवतार, वराहावतार,
~कंदः
वाराहीकंद, एक खाद्य पदार्थ,
~कर्णः
एक प्रकार का बाण,
~कर्णिका
एक प्रकार का अस्त्र,
~कल्पः
वराहावतार का समय, वह काल जब विष्णु का वराह का अवतार धारण किया,
~मिहिरः
एक विख्यात ज्योतिर्वेत्ता, बृहत्संहिता का प्रणेता (राजा विक्रमादित्य की राज सभा के नवरत्नों में से एक),
~शृंगः
शिव का नाम ।