संस्कृत-शब्दकोशः

वर्मण वर्मि

वर्मन्

वर्मन् (नपुं०) [आवृणोति अंगम्–वृ+मनिन्]


1. कवच, जिरहख्तर– स्वहृदयमर्मणि वर्म करोति सजलनलिनीदलजालम्–गीत०४, रघु० ४।५६, मुद्रा० २।८
2. छाल, वल्कल, पुं० क्षत्रियों के नामों के साथ लगने वाला एक प्रत्यय–यथा चंडवर्मन्, प्रहारवर्मन् तु० दास ।
समस्त पद
~हर
(वि०)
1. कवचधारी
2. इतना बड़ा जो कवच धारण कर सके (अर्थात् युद्ध में भाग लेने के योग्य)–सम्यग्विनीतमथ वर्महरं कुमारम्–रघु०८।९४।



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