संस्कृत-शब्दकोशः

वसिष्ठ वसुक

वसु

वसु (नपुं०) [वस्+उन्]


1. दौलत, धन स्वयं प्रदुग्धे ऽस्य गुणैरुपस्नुता वसूपमानस्य वसूनि मेदिनी–कि० १।१८, रघु० ८।३१, ९।६
2. मणि, रत्न
3. सोना
4. पानी वस्तू. द्रव्य
6. एक प्रकार का नमक
7. एक जड़ी–विशेष, वृद्धि (पुं०)
1. एक देव समूह (इस अर्थ में ब० व०) जो गिनती में आठ है–1. आप
2. ध्रुव
3. सोम
4. धर या धव
5. अनिल
6. अनल
7. प्रत्यूष और
8. प्रभास, कभी–कभो 'आप' के स्थान में 'अह' को गिनते हैं –
“धरो ध्रुवश्च सोमश्च अहश्चैवानिलोऽनलः ।
प्रत्यूषश्च प्रभासश्च वसवोऽष्टाविति स्मृताः ॥”
2. आठ की संख्या
3. कुबेर
4. शिव
5. अग्नि
6. वृक्ष
7. सरोवर. तालाब
8. रास
9. जुवा बांधने की रस्सी १० बागडोर
11. प्रकाश की किरण –निरकाश यद्रविमपेतवसुं वियदालयादपरदिग्गणिका शि० ९।१०, शिथिलवसुमगाधे मग्नमापत्ययोधौ–कि० १।४६, (दोनों अवस्थाओं में 'वसु' शब्द का अर्थ धन दौलत भी है)
12. सूर्य –स्त्री. प्रकाश, किरण ।
समस्त पद
~ओकसारा, ~औकसारा
1. इन्द्र की नगरी अमरावती
2. कुबेर की नगरी अलका
3. एक नदी का नाम जो अलका या अमरावती से संबद्ध है,
~कीटः, ~कृमिः
भिक्षुक,
~दा
पृथ्वी,
~देवः
कृष्ण के पिता और सूर के पुत्र का नाम एक वदुवंशी,
°भूः, ~सुतः
कृष्ण के विशेषण
~देवता, ~देव्या
धनिष्ठा नाम का नक्षत्र,
~धर्मिका
स्फटिक,
~धा
1. पृथ्वी – वसुधेयमवेक्ष्यतां त्वया–रधु० ८।८३
2. भूमि–कु० ४।४,
°अधिपः
राजा
°धरः
पहाड़ विक्रम० १७
°नगरम्
वरुण की राजधानी
~धारा, ~भारा
कुबेर की राजधानी,
~प्रभा
आग की सात जिह्नाओं में से एक,
~प्राणः
अग्नि का विशेषण,
~रेतस्
(पुं०) अग्नि,
~श्रेष्ठम्
1. तपाया हुआ सोना
2. चाँदी,
~वेणः
कर्ण का नाम,
~स्थली
कुबेर की नगरी का विशेषण ।


वसुः [वस्+उन्]


1. घी, घृत (जैसा कि 'वसोर्धारा' में),
2. धन, दौलत, रत्न, जवाहर
3. सोना
4. जल ।
समस्त पद
~उत्तमः
भीष्म,
~धारिणी
धरा, पृथ्वी,
~पाल:
राजा,
~भम्
धनिष्ठा नक्षत्र,
~रोचिस्
अग्नि ।

परिशिष्ट



Correction: