संस्कृत-शब्दकोशः

वायसविद्या वायुकुम्भ

वायु

वायुः [वा उण् युक् च]


1. हवा, पवन–वायुर्विधूनयति चम्पकपुष्परेणून् कवि० (इसकी उत्पत्ति के लिए दे० मनु० १।७६–सात पवनमार्ग है –
“आवहः प्रवहश्चैव संवहश्चोद्वहस्तथा ।
विवहाख्यः परिवहः परावह इति क्रमात् ॥”
)
2. वायुदेवता, पवनदेवता
3. जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण पांच प्रकार का वायु गिनाया गया है प्राण, अपान, समान, व्यान और उदान
4. वातप्रकोप, वातरोग में ग्रस्तता ।
समस्त पद
~आस्पदम्
आकाश, अन्तरिक्ष,
~केतुः
धूल,
~कोण:
पश्चिमोत्तरी कोना,
~गण्डः
अफारा (जो अनपच के कारण हुआ हो),
~गुल्मः
1. आंधी, तूफान
2. भंवर,
~गोचरः
पवन का परास,
~ग्रस्त
(वि०)
1. वातरोग में ग्रस्त, जिसे अफारा हो गया हो
2. गठिया रोग से ग्रस्त,
~जातः, ~तनयः, ~नन्दनः, ~पुत्रः, ~सुतः, ~सूनुः
हनुमान् या भीम के विशेषण,
~दारुः
बादल,
~निघ्न
(वि०) वात प्रकोप से पीड़ित सनकी, पागल, उन्मत्त,
~पुराणम्
अठारह पुराणों में से एक,
~फलम्
1.ओला
2. इन्द्रधनुष,
~भक्षः, ~भक्षणः, ~भुज्
(पुं०)
1. जो केवल वायु पीकर रहे, संन्यासी
2. साँप–तु० पवनाशनः,
~रोषा
रात्रि,
~रुग्ण
(वि०) वायुप्रकोप के कारण अस्वस्थ–रघु० ९।६३,
~वर्त्मन्
(पुं०, नपुं०) आकाश, अन्तरिक्ष,
~वाहः
धूआं,
~वाहिनी
शिरा, धमनी, शरीर की नाडी,
~वेग, ~सम
(व०) पवन की भांति तेज,
~सखः, ~सखिः
(पुं०) आग ।



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