वासक (वि०) (स्त्री० –‘का’, –‘सिका’) [वास्+णिच् + ण्वुल्]
1. सुगन्धित करने वाला, सुवासित करने वाला, धुपाने वाला, धूप देने वाला
2. बसाने वाला, आवाद करने वाला,
~कम्
वस्त्र, कपड़े ।
समस्त पद
~सज्जा, ~सज्जिका
वह स्त्री जो अपने प्रेमी का स्वागत, सत्कार करने के लिए अपने आपको वस्त्रालंकार से भूषित करती तथा घर को साफ सुथरा रखती है, विशेषतः उस समय जब कि प्रेमी का मिलन नियत किया हुआ हो; भावी नायिका, नायिका का भेद साहित्यदर्पणकार परिभाषा देता है:–कुरुते मंडनं यस्याः (या तु) सज्जिते वासवेश्मनि, सा तु वासकसज्जा स्याद्विदितप्रियसंगमा–१२०; भवति विलंबिनि विगलितलज्जा विलपति रोदिति वासकसज्जा –गीत०६।