विग्रहः [वि०+ग्रह् +अप्]
1. फैलाव, विस्तार, प्रसार
2. रूप, आकृति, शक्ल
3. शरीर –त्रयी विग्रहवत्येव सममध्यात्मविद्यया–मालवि० १।१४, गूढ विग्रहः–रघु० ३।३९, ९।५२, कि० ४।११, १२।४३
4. पृथक्करण, विघटन, विश्लेपण, वियोजन (यथा समास के घटक पदों को पृथक् पृथक् करना) वृत्त्यर्थ समासार्थ) बोधकं वाक्यं विग्रहः
5. कलह, झगडा, (बहुधा प्रणयकलह) विग्रहाच्च शयने पराङ्मुखीर्नानुनेतुमबलाः स तत्वरे–रघु० ९।३८, ९।४७, शि० ११।३५
6. संग्राम, शत्रुता, लडाई, युद्ध, (विप० संधि) नीति के छः गुणों में से एक दे० गुण
7. अननुग्रह
8. भाग, अंश, प्रभाग ।