विच्छित्तिः (स्त्री०) [वि+छिद्+क्तिन्]
1. काट डालना, फाड़ देना–भर्तृ० ३।११
2. बांटना, अलग–अलग करना
3. अन्तर्धान, अनुपस्थिति, लोप
4. विराम
5. शरीर को उबटन या रङ्गलेप से रङ्गना, रङ्गचित्रण, महावर–श० ७।५, शि० १६।८४
6. सीता (घर आदि की) हद
7. कविता में विराम, यति
8. विशेष प्रकार की शृङ्गारप्रिय भावभंगिमा, जिसमें वेशभूषा के प्रति उपेक्षा भी सम्मिलित हो (अपने व्यक्तिगत सौन्दर्य के अभिमान के कारण)–स्तोकाप्याकल्परचना विच्छित्तिः कांतिपोषकृत्–सा० द० १३८ ।