विटपः [विटं विस्तारं वा पाति पिबति–पा+क]
1. शाखा, (लता या वृक्ष की) टहनी–कोमलविटपानुकारिणौ बाहू – श० १।२१, ३१, यदनेन तरुर्न पातितः क्षपिता तद्बिटपाश्रिता लता–रघु० ८।४७, शि० ४।४८, कु० ६।४१
2. झाड़ी
3. नया अंकुर या किसलय –शि० ७।५३
4: गुल्म, झुण्ड, झुरमुट
5.विस्तार
6. अंडकोष पटल ।
विटपः [विट+पा+क]
लता, बेल (जैसा कि 'भ्रूविटप' में) ।
परिशिष्ट