संस्कृत-शब्दकोशः

विद्धसालभञ्जिका विद्युत्

विद्या

विद्या [विद् + क्यप् +टाप्]


1. ज्ञान, अवगम, शिक्षा, विज्ञान–( तां) विद्यामभ्यसनेनेव प्रसादयितुमर्हसि –रघु० १।८८, विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्–भर्तृ० २।२०, (कुछ विद्वानों के मतानुसार विद्या चार हैं–आन्वीक्षिकी त्रयी वार्ता दंडनीतिश्च शाश्वती – काम०, कि० २।६, इन चारों में मनु० ७।४३ पांचवीं विद्या–आत्मविद्या–को और जोड़ देता है । परन्तु विद्या साधारणतः चौदह मानी जाती है अर्थात् चार वेद, छः वेदांग, धर्म, मीमांसा, तर्क या न्याय, और पुराण–दे० चतुर के नीचे चतुर्दश विद्या, तथा नै० १।४)
2. यथार्थ ज्ञान, अध्यात्म ज्ञान–उत्तर० ६।६, तु० अविद्या
3. जादू, मन्त्र
4. दुर्गादेवी
5. ऐन्द्रजालिक कुशलता ।
समस्त पद
~अनुपालिन्, ~अनुसेविन्
(वि०) ज्ञानोपार्जन करने वाला,
~आगमः, ~अर्जसम्, ~अभ्यासः
ज्ञान प्राप्त करना, शिक्षा ग्रहण करना, अध्ययन,
~अर्थः
ज्ञान की खोज,
~अर्थिन्
(वि०) छात्र, विद्याव्यसनी, शिष्य,
~आलयः
विद्यालय, महाविद्यालय, विद्यामन्दिर,
~उपार्जनम्
=विद्यार्जनम्,
~करः
विद्वान् पुरुष,
~चण, ~चंचु
(वि०) अपने ज्ञान एवं शिक्षा के लिए प्रसिद्ध,
~देवी
सरस्वती देवी,
~धनम्
विद्यारूपी दौलत,
~धरः (स्त्री० –री)
एक देवयोनि विशेष, अर्धदेवता,–
प्राप्तिः
=विद्यार्जन,
~लाभः
1. ज्ञान की प्राप्ति
2. ज्ञान के द्वारा प्राप्त किया गया धन आदि,
~विहीन
(वि०) निरक्षर, अज्ञानी,
~वृद्ध
(वि०) ज्ञान में बढ़ा हुआ, शिक्षा में प्रगतिशील,
~व्यसनम्, ~व्यवसायः
ज्ञान की खोज ।


विद्या [विद्+क्यप्+टाप्]


1. दुर्गा देवी
2. सरस्वती देवी
3 ज्ञान, शिक्षा ।
समस्त पद
~आतुर
(वि०) जो ज्ञान प्राप्त करने के लिए उतावला हो –विद्यातुराणां न सुखं न निद्रा –नीति०
~ईशः
शिव का नाम,
~कोशगृहम्, ~कोशसंग्रह, ~कोशसमाश्रयः, पुस्तकालय,
~बलम्
जादू की शक्ति,
~भाज्
(वि०) शिक्षित, पढ़ालिखा,
~वंशः
अध्ययन की किसी विशिष्ट शाखा के अध्यापकों की कालक्रमानुसार सूची ।

परिशिष्ट



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