विनिद्र (वि०) [विगता निद्रा यस्य–प्रा० ब०]
1. निद्रा रहित, जागा हुआ (आलं० से भी) रघु० ५।६५2. मुकुलित, खुला हुआ, खिला हुआ, फूला हुआ –विनिद्रमंदाररजोरुणांगुली– कु० ५।८०।