संस्कृत-शब्दकोशः

विरम विरलभक्ति

विरल

विरल (वि०) [वि+रा+कलन्]


1. छिद्रों से युक्त, जिसके बीच में अन्तराल हों, पतला, जो सघन न हा, सटा हुआ न हो– विपर्यासं यातो घनविरलभावः क्षितिरुहाम्– उत्तर० २।२७, भवति विरलभक्तिम्लान पुष्पोपहारः – रघु० ५।७४
2. पतला, कोमल
3. ढीला, विस्तृत
4. निराला, दुर्लभ, अनूठा,–पच. १२९
5. कम, थोडा (संख्या या परिमाण संबंधा) –तत्त्वं किमपि काव्यानां जानाति विरलो भुवि–भामिः ११।१७, विरला तपच्छवि:–शि० ९।३
6. दूरवर्ती, दूरस्थ, लम्बा (समय या दूरी आदि),
~लम्
दही, जमाया हुआ दूध,
~लम्
(अव्य०) कठिनाई से, कभी कभी, जो बहुतायत से न हो, नहीं के बराबर ।
समस्त पद
~जानुक(वि०), ~धनुः, ~पदी
जिसके घुटनों में अधिक दूरी हो,
~द्रवा
एक प्रकार की लपसी ।



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