विशेषक (वि०) [वि+शिष्+ण्वुल्]
प्रभेदक,
~कः, ~कम्
1. एक प्रभेदक विशिष्टता या लक्षण विशेषण
2. चन्दन या केसर का माथे पर लगा तिलक – मालवि० ३।५
3. रंगीन उबटन तथा अन्य सुगंधित पदार्थों से मुख या शरीर पर रेखांकन करना –स्वेदोद्गमः किंपुरुषांगनानां चक्रे पदम् पत्रविशेषकेषु –कु० ३।३३, रघु० ९।२९, शि० ३।६३, १०।१४,
~कम्
तीन श्लोकों का समूह जो व्याकरण की दृष्टि से एक ही वाक्य बनता है –
“द्वाभ्यां युग्ममिति प्रोक्तं त्रिमिः श्लोकैर्विशेषकम् ।
कलापकं चतुर्भिः स्यात्तदूर्ध्वं कुलकं स्मृतम् ॥”