संस्कृत-शब्दकोशः

वृतिमार्ग वृत्त

वृत्

वृत्
i (दिवा० आ० वृत्यते)
1. चुनना, पसंद करना –तु० वावृत्
2. वितरण करना, बाँटना ।
ii (चुरा० उभ० वर्तयति-ते) चमकना ।
iii (भ्वा० आ० वर्तते, परन्तु लुङ्, लृट्, लुट् तथा लृङ् लकार में एवं सन्नंत में पर० भी, वृत्त)
1. होना, विद्यमान होना, डटे रहना, मौजूद होना, जीते रहना, टिके रहना –इदं में मनसि वर्तते,–श० १, अत्र विषयेऽस्माकं महत्कुतूहलं वर्तते –पंच० १, मरालकुलनायकः कथय रे कथं वर्तताम् –भामि० १।३, केवल संयोजक के रूप में बहुधा प्रयुक्त, अतीत्य हरितो हरींश्च वर्तन्ते वाजिनः –श० १
2. किसी विशेष दशा या परिस्थिति में होना–पश्चिमे वयसि वर्तमानस्य –का०, इसी प्रकार दुःखे, हर्षे, विषादे –वर्तते
3. होना, घटित होना, आ पड़ना, सामने आना –सीता देव्याः किं वृत्तमित्यस्ति काचित्प्रवृत्तिः –उत्तर० २, सायं संप्रति वर्तते पथिक रे स्थानान्तरं गम्यताम् –सुभा०, 'अब सायंकाल हो गया है –शृङ्गार ०६, भग० ५।२६
4. चलते रहना, प्रगतिशील रहना –सर्वथा वर्तते यज्ञ:–मन० २।१५, निर्व्याजमिज्या ववृते –भट्टि० २।३७, रघु० १२।५६
5. संधारित या संपोषित होना, जीवित रहना, जीते रहना (आलं० से भी) –फलमुलवारिभिर्वर्तमाना –का० १७२, मनु० ३।७७
6. मुड़ना, लुढकते रहना, चक्कर खाना –यावदियं लोकयात्रा वर्तते –वेणी० ३
7. अपने आप को कार्य में लगाना, काम में लगना, आरम्भ करना (अधि० के साथ) –भगवान् काश्यपः शाश्वते ब्रह्मणि वर्तते – श० १, इतरो दहने स्वकर्मणां ववृते ज्ञानमयेन वह्निना –रघु० ८।२०, मनु० ८।३४६, भग० ३।२२
8. कर्तव्य निभाना, व्यवहार करना, आचरण करना, अनुष्ठान करना, अभ्यास करना (प्राय: अधि० के साथ या स्वतंत्र रूप से)– आर्योऽस्मिन् विनयेन वर्तताम् –उत्तर० ६, कविर्निसर्गसौहृदेन भरतेषु वर्तमानः –मा० १, औदासीन्येन वर्तितुम् –रघु० १०।२५, मनु० ७।१०४, ८।१७३, ११।३०
9. कार्य करना, विशेष प्रकार का आचरण करना –साध्वीं वृत्तिं वर्तते –'वह सत्कार्य में प्रवृत्त होता है'
10. अर्थ रखना, अभिप्राय बतलाना, अर्थ में प्रयुक्त होना –पुष्यसमीपस्थे चन्द्रमसि पुष्यशब्दो वर्तते –पा० ४।२।३ पर महाभाष्य (प्रायः कोशों में इसी अर्थ में प्रयुक्त होता है)
11. प्रवृत्त करना, प्रेरित करना –(संप्र० के साथ) –पुत्रेण किं फलं यो वै पितृदुःखाय वर्तते
12. सहारा लेना, आश्रित होना –प्रेर० (वर्तयति–ते
1. प्रवृत्त कराना
2. घुमाना, चक्कर दिलाना –श० ७।६
3. (अस्त्र–शस्त्र) घुमाना, पैंतरे बदलना, घुमा कर फेंकना –भट्टि० १५।३७
4. कार्य करना, अभ्यास करना, प्रदर्शित करना –मा० ९।३३
5. संपन्न करना, निबटाना, ध्यान देना, नज़र डालना –सोऽधिकारमभिकः कुलोचितं काश्चन स्वयमवर्तयत्समा: –रघु० १९।४, महावी० ३।२३
6. बिताना, (समय आदि) गुजारना
7. जीवन निर्वाह करना, जीते रहना –कि० २।१८, रघु० १२।२०
8. वर्णन करना, बयान करना –इच्छा० (विवृत्सति, विवर्तिषते),
अति–
1. परे जाना, आगे बढ़ जाना, –मा० १।२६
2. आगे निकल जाना, सर्वोत्कृष्ट होना –कि० ३।४०, शि० १४।५९
3. उल्लंघन करना बाहर कदम रखना, अतिक्रमण करना –शि० ६।१९
4. उपेक्षा करना, अवहेलना करना –मनु० ५।१६
5. चोट पहुँचाना, क्षतिग्रस्त करना, नाराज करना
6. पराजित करना, वशीभूत करना
7. (समय का) बिताना
8. विलंब करना, देरी करना –मनु० २।३८,
अनु–
1. अनुसरण करना, अनुरूप होना, अनुकूल कार्य करना –प्रभुचित्तमेव हि जनोऽनुवर्तते –शि० १५।४१, मा० ३।२
2. अनुरंजन करना, दूसरे की इच्छा के अनुसार अपने आपको बनाना, दूसरे के द्वारा पथप्रदर्शन प्राप्त किया जाना
3. आज्ञा मानना
4. मिलना–जुलना, नकल करना
5. प्रसन्न करना, खुश करना
6. (व्या० में) किसी पूर्ववर्ती सूत्र से आवृत्ति प्राप्त करना (प्रेर०)
1. मुड़ना
2. अनुगमन करना, आज्ञा मानना,
अप–
1. मुड़ जाना, पीठ मोड़ना –तस्मादपावर्तत दूरकृष्टा नीत्येव लक्ष्मी: प्रतिकूलदैवात् –रघु० ६।५८, ७।३३
2. व्यत्यस्त या व्युत्क्रान्त होना, उलटा हो जाना –कि० १२।४९
3. मुँह नीचे कर लेना –मा० ३।१७, (प्रेर०) एक ओर हो जाना, झुकना –मा० १।४०, कि० ४।१५,
अभि–
1. पहुँचाना, जाना, निकट होना, समीप होना, मुड़ना –इत एवाभिवर्तते –श० १, रघु० २।१०
2. आक्रमण करना, धावा बोलना, टूट पड़ना –कि० १३।३
3. आरम्भ करना, (दिन), निकलना
4. सर्वोपरि होना, सबसे ऊपर होना
5. होना, मौजूद होना, घटित होना,
आ–
1. चक्कर खाना
2. वापिस आना –रघु० १।८९, २।१९
3. पास जाना,
4. बेचैन होना, चक्कर खाना –मा० १।४१,
उद्–
1. चढ़ना
2.उदित होना, बढ़ना
3. घमंडी या अभिमानी होना
4. उमडना, बह निकलना –उद्वृत्तः क इव सुखावहः परेषाम् –शि० ८।१८, मुद्रा० ३।८, रघु० ७।५६,
उप–
1. पहुँचना
2. लौटना
नि–
1. वापिस आना, लौटना –न च निम्नादिव सलिलं निवर्तते मे ततो हृदयम् –श० ३।१, कु० ४।३०, रघु० २।४३, भग० ८।२१, १५।४
2. भाग जाना, पलायन करना –भट्टि० ५।१०२
3. मुड़ जाना, आंखें फेर लेना –रघु० ५।२३, ७।६१
4. अलग रहना –प्रसमीक्ष्य निवर्तेत सर्वमांसस्य भक्षणात् – मनु० ५।४९, १।५३, भट्टि० १।१८, निवृत्तमांसस्तु जनकः –उत्तर० ४
5. मुक्त होना, बच निकलना –भग० १।३९
6. बोलना बन्द कर देना, रुक जाना; ठहर जाना
7. हट जाना, अन्त होना, बन्द हो जाना, अन्तर्धान होना –भग० २।५९, १४।२२, मनु० ११।१८५, १८६
8. रुकवाना, निकलवाना, (प्रेर०)
1. लौटाना, वापिस भेजना –रघु० २।३, ३।४७, ७।४४
2. वापिस लेना, दूर रहना, मुड़ जाना, मन फेर लेना –रघु० २।२८, कु० ५।११,
निस्–
1. समाप्त होना, अन्त होना, –भट्टि ० ८।६९
2. संपन्न होना –रघु० १७।६८, मनु० ७।१६१,
3. रुक जाना, न होना,–भट्टि० १६।६, (प्रेर०)
1. सम्पन्न करना, निष्पन्न करना, समाप्त करना, पूरा करना –रघु० २।४५, ३।३३, ११।३०,
परा–
लौटना, वापिस आना,
परि–
1. घूमना, चक्कर खाना –कु० १।१६
2. इधर–उधर भ्रमण करना, इधर–उधर आना जाना
3. बदलना, विनिमय करना, अदला–बदली करना
4. पीठ मोड़ना –रघु० ४।७२, विक्रम० १।१७
5. होना, आ पड़ना –मा० ९।८
6. क्षीण होना, नष्ट होना, लुप्त होना –मा० १०।६,
प्र–
1. आगे चलना, चलते जाना, प्रगति करना, –पंच० १।८१
2. उदित होना, उत्पन्न होना, फूट निकलना
3. होना, घटित होना, आ पड़ना
4. आरंभ करना, शुरू करना, (प्राय: तुमुन्नन्त) –हन्त प्रवृत्तं संगीतकं –मालवि० १, कु० ३।२५
5. प्रयत्न करना, जोर लगाना –प्रवर्ततां प्रकृतिहिताय पार्थिवः– श० ७।३५
6. अमल करना, अनुसरण करना –पंच० १।११६,
7. कार्य में लगना, व्यस्त होना,–श० १, कु० ५।२३
8. करना, कार्य में लगना –श० ६,
9. व्यवहार करना
10. व्याप्त होना, विद्यमान होना –राजन् प्रजासु ते कश्चिदपचारः प्रवर्तते –रघु० १५।४७
11. ठीक उतरना
12. बिना रुकावट के प्रगति करना, फलना–फूलना,–भग० १७।२४, मनु० ३।६१, (प्रेर०)
1. प्रगति करना, जारी रखना –मुद्रा० १,
2. सूत्रपात करना
3. जारी करना, स्थापित करना, बुनियाद रखना
4. हांकना, प्रेरित करना, उकसाना, उद्दीप्त करना
5. उन्नति करना, प्रगति करना,
प्रतिनि–
1. पीठ मोड़ना, लौटना –गत्वेव पुनः प्रतिनिवृत्तः –श० १।२९, विक्रम० १
2. चक्कर काटना,
वि–
1. मुड़ना, लुढ़कना, चक्कर काटना, घूमना –मा० १।४०
2. एक ओर हो जाना, झुकना –रघु० ६।१६, श० २।११
3. होना, घटित होना,
विनि–
1. लौटना
2. रुक जाना, अन्त होना –भग० २।५९, मनु० ५।७
3. हाथ खींचना, मुड़ जाना, अलग रहना –देवनात्, युद्धात् आदि,
विपरि–
चक्कर काटना (आलं० से भी) –भग० ९।१०,
व्यप–
1. लौटना. वापिस मुडना –चेतः कथं कथमपि व्यपवर्तते –मा० १।१८
2. हाथ खींचना, छोड़ देना –उत्तर० ५।८,
व्या–
1. वापिस होना, मुड़ना –सहभुवा व्यावर्तमाना ह्रिया –रत्न० १।२
2. मुड़ना, हटना, उलट होना –विषयव्यावृत्तकौतूहलः –विक्रम० १।९, (प्रेर०) प्रतिबन्ध लगाना, सीमित करना, निकाल देना, गिरफ्तार करना –तु शब्दः पूर्वपक्षं व्यावर्तयति –शारी०, –अपवाद इवोत्सर्गं व्यावर्तयितुमीश्वरः –रघु० १५।७,
सम्–
1.8 घटित होना –ते यथोक्ताः संवृत्ताः –पंच० १
2. पैदा होना, उदय होना, फूटना, निकलना
3. घटित होना, आ पड़ना
4. सम्पन्न होना ।



Correction: