वै (अव्य०) [वा+डै]
स्वीकृति या निश्चयवाचक अव्यय (निःसन्देह, सचमुच, वस्तुतः) परन्तु केवल पूरक के रूप में प्रयुक्त – आपो वै नरसूनवः –मनु० १।१०, २।२३१, ९।४९, ११।७७, यह कभी कभी सम्बोधन के रूप में भी प्रयुक्त होता है तथा कभी कभी अनुनय को प्रकट करता है ।
वै (भ्वा० पर० वायति)
1. सूखना, शुष्क होना
2. म्लान, निढाल, अवसन्न ।