व्याघ्रः [व्याजिघ्रति –वि+आ+घ्रा+क]
1. वाघ, चीता
2. (समास के अन्त में) सर्वोत्तम, प्रमुख, मुख्य जैसा कि नरव्याघ्र या पुरुषव्याघ्र में
3. लालरंग का एरंड का पौधा,
~घ्री
मादा चीता – व्याघ्रीव तष्ठीत जरा परितर्जयन्ती –भर्तृ० ३।१०९ ।
समस्त पद
~अट:
चातक पक्षी,
~आस्यः
विलाव,
~नखः, –खम्
1. बाघ का पंजा
2. एक प्रकार का गन्धद्रव्य
3. खरौंच, नखक्षत,
~नायकः
गीदड़ ।