संस्कृत-शब्दकोशः

व्याघ्र व्याजनिद्रा

व्याज

व्याजः [व्यजति यथार्थव्यवहारात् अपगच्छति अनेन –वि +अज्+घञ्]


1. धोखा, चाल, छल, जालसाजी
2. कला कौशल –अव्याज मनोहरं वपुः –श० १।१८, 'स्वाभाविक रूप से प्रिय'
3. बहाना, व्यपदेश, आभास –ध्यानव्याजमुपेत्य –नाग० १।१, रघु० ४।२५, ५८, १०।६६, ११।६६
4. युक्ति, चाल, कूटयुक्ति –व्याजार्धसन्दर्शितमेखलानि –रघु० १३।४२ ।
समस्त पद
~उक्तिः
(स्त्री०) एक अलङ्कार जिसमें किसी कारण के स्पष्ट फल का जानबूझ कर कोई दूसरा कारण बताया जाता है, जहाँ वास्तविक भावना को कोई दूसरा कारण बताकर छिपा लिया जाता है –दे० काव्य १० ‘व्याजोक्ति' के नीचे
2. परोक्ष सङ्केत, व्यंग्योक्ति,
~निन्दा
छल या कपट से की गई निन्दा,
~सुप्त
(वि०) झूठमूठ सोया हुआ,
~स्तुतिः
(स्त्री०) अंग्रेजी के 'आइरनी' (Irony) से मिलता जुलता एक अलङ्कार जिसमें व्यक्त की गई प्रशंसा से निन्दा तथा प्रत्यक्ष निन्दा से स्तुति उपलक्षित होती है –व्याजस्तुतिर्मुखे निन्दा स्तुतिर्वा रूढिरन्यथा –काव्य० १० ।



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