व्यासः [वि+अस्+घञ्]
1. वितरण, विभाजन
2. समास का विग्रह या विश्लेषण
3. अलगाव, पृथकता
4. प्रसार, फैलाव
5. अर्ज, चौड़ाई.
6. वृत्त का व्यास
7. उच्चारणदोष
8. व्यवस्था, संकलन
9. व्यवस्थापक, संकलयिता
10. एक प्रसिद्ध ऋषि का नाम (यह पराशर का पुत्र था, सत्यवती इसकी माता थी) (सत्यवती का शन्तनु के साथ विवाह होने से पूर्व इसका जन्म हुआ था) और जन्म होते ही यह बन में चला गया । जहाँ यह वानप्रस्थ होकर घोर तपस्साधना में लीन रहा जब तक कि इसकी माता सत्यवती ने अपने पुत्र विचित्रवीर्य की विधवा पत्नियों में सन्तान उत्पन्न करने के लिए इसे नहीं बुलाया । इस प्रकार यह पाण्डु, धृतराष्ट्र और विदुर का पिता था । पहले पहले यह रंग का काला होने तथा एक द्वीप पर सत्यवती से जन्म लेने के कारण 'कृष्णद्वैपायन' कहलाया, परन्तु बाद में इसका नाम व्यास पड़ा क्यों कि इसने ही वेदों के मन्त्रों को क्रमबद्ध कर वर्तमान रूप दिया । "विव्यास वेदान्यस्मात्स तस्माद्व्यास इतिस्मृतः" । ऐसा विश्वास किया जाता है कि इसी ने महाभारत की रचना कर उसे गणपति द्वारा लेखबद्ध करवाया । अठारह पुराणों तथा ब्रह्मसूत्रों का रचयिता भी इसी को माना जाता है, यह सात चिरजीवियों में से एक हैं तु० 'चिरजीविन्’)
11. वह ब्राह्मण जो सार्वजनिक रूप से पुराणों की कथा करता है ।