शकारः (पुं०) राजा की रखैल का भाई, राजा की उस पत्नी का भाई जिससे विधिपूर्वक विवाह न किया गया हो, अनूढा भ्राता (इसका वर्णन बहुधा मिश्रित मिलता है, नीच कुल में जन्म लेने के कारण मूर्खता, घमंड, आदि अवगुणों के विद्यमान रहते हुए भी राजा का साला होने के कारण इसे उच्चपद मिल जाता है, शूद्रकरचित मृच्छकटिक नाटक में यह प्रमुख भाग लेता है, मिथ्या यश, हलकापन तथा ओछापन इसके चरित्र की विशेषता है, बार–बार उसके उच्चसम्बन्ध का उल्लेख, उसकी उपहासास्पद मूर्खता, एवं प्रमाद तथा अपनी इच्छा की पूर्ति न होने पर नायिका का गला घोटने की क्रूरता इसकी योग्यता के परिचायक हैं –सा० द० ८१ में इसकी परिभाषा दी गई है –
“मदमूर्खताभिमानी दुष्कुलतैश्वर्यसंयुक्तः ।
सोऽयमनूढाभ्राता राज्ञः श्यालः शकार इत्युक्तः ॥”