संस्कृत-शब्दकोशः

शङ्कुला शङ्ख

शङ्क्

शङ्क् (भ्वा० आ० शङ्कते, शङ्कित)
1. संदेह करना, अनिश्चित होना, संकोच करना, संदिग्ध होना–शङ्के जीवति वा न वा –राम०
2. डरना, भय होना, त्रस्त होना (अपा० के साथ) –नाशङ्किष्ट विवस्वतः–भट्टि १५।३९ –अशङ्कितेभ्यः शङ्केत शङ्कितेभ्यश्च सर्वतः –सुभा०
3. शंका करना, अविश्वास करना, भरोसा न करना –स्वैर्दोषैर्भवति हि शङ्कितो मनुष्यः –मृच्छ० ४।२
4. सोचना, विश्वास करना, उत्प्रेक्षा करना, कल्पना करना, संभव समझना, शंका करना, डरना –त्वय्यासन्ने नयनमुपरिस्पन्दि शङ्के मृगाक्ष्याः –मेघ० ९५, नाहं पुनस्तथा त्वयि यथा हि मां शङ्कसे भीरु
~विक्रम०
३।१४, भट्टि० ३।२६, नै० २२।४२
5. आक्षेप करना, अपनी शंका या ऐतराज उठाना –अत्रेदं शङ्क्यते, (बहुधा विवादास्पद भाषा में प्रयुक्त) –न च ब्रह्मणः प्रमाणान्तरगम्यत्वं शङ्कितुं शक्यम् –सर्व०,
अभि–
1. शंका करना
2. संदिग्ध या अनिश्चयी होना –मनु० ६।६६,
आ–
शङ्का करना, भरोसा न करना, संदेह रखना –भट्टि० २१।१
2. सन्देह करना, विश्वास करना, सोचना –आशङ्कसे यदग्निं तदिदं स्पर्शक्षभं रत्नम् –श० १।२८, शि० ३।७२ भट्टि० ६।६ मनु० ७।१८५
3. डरना, आशंका करना, भरतागमनं पुनः आशक्य –रघु० १२।२४, पंच० १।३, ९२.
4. आक्षेप करना, संदेह करना –अत एव न ब्रह्मशब्दस्य जात्याद्यर्थान्तरमाशङ्कितव्यम् –शारी० (तथा कुछ अन्य स्थानों पर).
परि–
1. शंका करना, विश्वास करना, उत्प्रेक्षा करना –पत्रेऽपि संचारिणि प्राप्तं त्वां परिशङ्कते –गीत० ६
2. संदेह करना, संदेहशील होना
3. डरना, भयभीत होना, –रघु० ८।७८,
वि–
,
1. शंका करना, डरना, संदेहशील या शंकालु होना,–विशङ्कसे भीरु यतोऽवधीरणाम् –श० ३।१४, सतीमपि ज्ञातिकुलैकसंश्रयां जनोऽन्यथा भर्तृमतीं विशङ्कते –५।१७
2. सत्ता का चिन्तन करना, उत्प्रेक्षा करना, कल्पना करना –विशङ्कमाना रमितं कयाऽपि जनार्दनं दृष्टवदेतदाह –गीत० ७ ।



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