शमः [शम्+घञ्]
1. मूकता, शान्ति, धैर्य
2. विश्राम, ठहराव, आराम, निवृत्ति
3. वासनाओं पर प्रतिबन्ध या अभाव, मानसिक शान्ति, विरक्ति–शमरतेऽमरतेजसि पार्थिवे –रघु० ९।४, कि० १०।१०, १६।४८, शि० २।९४ श० २।७, भग० १०।४
4. निराकरण, लघुकरण, उन्नयन, सन्तोषीकरण, (शोक, प्यास, भूख आदि का) प्रशमन–शममुपयातु ममापि चित्तदाहः– उत्तर० ६।८, शममेष्यति मम शोकः कथं नु वत्से –श० ४।२०
5. शान्ति, जैसा कि 'शमोपन्यास' वेणी० ५
6. (संसार की समस्त भ्रान्तियों व आसक्तियों से) मोक्ष
7. हाथ ।
समस्त पद
~अन्तकः
कामदेव (मानसिक शान्ति को नष्ट करने वाला),
~पर
(वि०) शान्त, मूक, विषयविरागी ।