शरणम् [शॄ +ल्युट्]
1. प्ररक्षा, सहायता, साहाय्य, प्रतिरक्षा–रघु० १४।६४, विक्रम० १।३, उत्तर० ४।२३
2. आसरा, आश्रयस्थान–कु० ३।८, पंच० २।२३ ओट, सहारा, विश्रामस्थल (व्यक्तियों के लिए भी प्रयुक्त)–सुरासुरस्य जगतः शरणम्–कि० १८।२२, संतप्तानां त्वमसि शरणम् –मेघ० ७, ‘शरणं गम्, –ई, –या’ शरण में जाना, आश्रय लेना, सहारा लेना –यामि हे कमिह शरणम् –गीत० ७
4. देवालय, शौचागार, कक्ष–अग्निशरणमार्गमादेशय–श० ५
5. आवास, घर, निवासस्थल –मुद्रा० ३।१५, भट्टि० ६।९
6. भट, बिल, माँद
7. क्षति, हत्या ।
समस्त पद
~आर्थिन्(वि०), ~एषिन्
(वि०) शरण या रक्षा ढूँढने वाला,–भर्तृ० २।७६,
~आगत, ~आपन्न
(वि०) प्ररक्षा या शरण में गया हुआ, आश्रय लेने वाला, आश्रयार्थी,
~उन्मुख
(वि०) शरण या प्ररक्षा खोजने वाला–रघु० ६।२१ ।
शरणम् [शृ+ल्युट्]
1. प्ररक्षण, सहायता
2. शरणागार, शरणाश्रम
3. आवास, घर
4. विश्रामस्थल
5. आहत करना, हत्या करना ।
समस्त पद
~आगतिः
प्ररक्षणार्थ पहुँचना,
~आलयः
शरणगृह,
~द
(वि०),
~प्रद
(वि.) शरण देने वाला ।
परिशिष्ट