शश: [शश्+अच्]
1. खरगोश, खरहा–मनु० ३।२७०, ५।१८
2. चन्द्रमा का कलंक (जो खरगोश की आकृति का समझा जाता है)
3. कामशास्त्र में वर्णित चार प्रकार के पुरुषों में से एक भेद । ऐसे मनुष्य के लक्षण ये हैं –मृदुवचनसुशील: कोमलांग: सुकेशः, सकलगुणनिधानं सत्यवादी शशोऽयम्–शब्द०, दे० रति० ३५ भी
4. लोध्र वृक्ष
5. बोल नामक खुशबूदार गोंद ।
समस्त पद
~अङ्क:
1. चाँद
2. कपूर, –
°अर्धमुख
(वि०) अर्धचन्द्राकार सिर वाला (बाण आदि) –
°मूर्तिः
चन्द्रमा का विशेषण
°लेखा
चाँद की कला, चन्द्रकला,
~अदः
1. बाज़, श्येन
2. पुरंजय के पिता इक्ष्वाकु का एक पुत्र,
~अदन:
बाज़, श्येन,
~ऊर्णम्, ~लोमम्
खरगोश के बाल, खरहे की त्वचा,
~धरः
1. चन्द्रमा–प्रसरति शशधरबिंबे –गीत० ७
2. कपूर
°मौलिः
शिव का विशेषण,
~लुप्तकम्
नखक्षत, नाखून का घाव,
°भृत्
(पुं०) चाँद
°भृत्
(पुं०) शिव का विशेषण,
~लक्ष्मणः
चाँद का विशेषण,
~लाञ्छन:
1. चन्द्रमा–कु० ७।६,
2. कपूर
~बिं(विं)दु:
1. चाँद
2. विष्णु का विशेषण,
~विषाणम्, ~शृंगम्
खरगोस का सींग (असंभव वात का संकेत करने के लिए प्रयुक्त, नितान्त (असंभावना) –कदाचिदपि पर्यटन् शशविषाणमासादयेत् – भर्तृ० २।५, शशशृङ्गधनुर्धरः–दे० 'खपुष्प',
~स्थली
गंगा यमुना के बीच की भूमि, दोआबा ।