संस्कृत-शब्दकोशः

शस्पा शाक

शस्य

शस्यम् [शस्+यत्]


1. अन्न, धान्य–दुदोह गां स यज्ञाय शस्याय मघवा दिवम्–रघु० १।२६
2. किसी वृक्ष या पौधे का फल या उपज –शस्यं क्षेत्रगतं प्राहुः सतुषं धान्यमुच्यते–दे० 'तंडुल' भी
3. गुण ।
समस्त पद
~क्षेत्रम्
अन्न का खेत,
~भक्षक
(वि०) अन्नहारी, अनाज खाने वाला,
~मञ्जरी
अनाज की बाल,
~मालिन्
(वि०) जिसका खेत हरा भरा खड़ा हो,
~शालिन्, ~संपन्न
(वि०) अन्न या धान्य से परिपूर्ण,
~शूकम्
अनाज का सिर्टा,
~संपद्
(स्त्री०) अनाज की बहुतायत,
~सम्ब(म्व)रः
शाल का वृक्ष, साल का पेड़ ।


शंस्य (वि०) [शंस्+ण्यत्]


1. प्रशंसा के योग्य
2. ऊँचे स्वर से पठित ।

परिशिष्ट



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