संस्कृत-शब्दकोशः

शंस्य शाककलम्बक

शाक

शाक (पुं०/नपुं०) [शक्यते भोक्तुम् –शक्+घञ्]


शाक, साग–भाजी, खाद्यपत्ते, फल या कन्द जो शाक की भांति उपयोग में लाये जायं–
“दिल्लीश्वरो वा जगदीश्वरो वा मनोरथान् पूरयितुं समर्थः ।
अन्यैनृपालैः परिदीयमानं शाकाय वा स्याल्लवणाय वा स्यात् ॥”
–जग०,
~क:
1. शक्ति, सामर्थ्य, ऊर्जा
2. सागौन का वृक्ष
3. शिरीष का वृक्ष
4. एक जाति का नाम–दे० शक
5. वर्ष, विशेषतः शालिवाहन संवत्सर ।
समस्त पद
~अङ्गम्
मिर्च,
~अम्लम्
महादा, इमली,
~आख्यः
सागौन का वृक्ष,
(–ख्यम्)
शाकभाजी,
~आहारः
शाकभाजी खाने वाला (वनस्पति खाकर जीवित रहने वाला),
~चुक्रिका
इमली,
~तरुः
सागौन का वृक्ष,
~पण:
1. मुट्ठीभर भार के बराबर तोल
2. मुट्ठीभर शाकभाजी,
~पार्थिवः
अपने नाम से वर्ष चलाने का शौकीन, दे० मध्यमपदलोपिन्,
~प्रति
(अव्य०) थोड़ी सी वनस्पति,
~योग्यः
धनिया,
~वृक्षः
सागौन का पेड़,
~शाकटम्, ~शाकिनम्
साग भाजी का खेत, रसोई के योग्य सब्जियों का उद्यान ।



Correction: