शान्त (भू० क० कृ०) [शम्+क्त]
1. प्रसन्न किया हुआ, दमन किया हुआ, धीरज दिलाया हुआ, सन्तुष्ट किया हुआ, प्रशान्त–रघु० १२।२०
2. चिकित्सित, सान्त्वना दिया हुआ – शान्तरोगः
3. घटाया हुआ, कम किया हुआ, समाप्त किया हुआ, हटाया हुआ, बुझाया हुआ, –शान्तरथक्षोभपरिश्रमम् –रघु० १।५८, ५।४७, शातार्चिषं दीपमिव प्रकाशः –कि० १७।१६
4. विरत, ठहराया हुआ–कु० ३।४२
5. मृत, उपरत
6. शान्त किया हुआ, दबाया हुआ
7. सौम्य, चुपचाप, बाधाहीन, निस्तब्ध, मूक, मौन –शान्तमिदमाश्रमपदम् –श० १।१६, ४।१९
8. सधाया हुआ, पाला हुआ–रघु० १४।७९
9. आवेशरहित, आराम से, सन्तुष्ट
10. छायादार
11. पवित्रीकृत
12. शुभ (शकुन)– (‘शान्तं पापम्’ 'अहो ! नहीं, यह कैसे हो सकता है, भगवान् करे ऐसी अशुभ या दुर्भाग्यपूर्ण घटना न घटे –श० ५, मुद्रा० १),
~त:
1. वैरागी, संन्यासी
2. शान्ति, निस्तब्धता, मौनभाव, सांसारिक विषय वासनाओं के प्रति तटस्थता की प्रभावना, दे० निर्वेद और रस,
~तम्
(अव्य०) बस, और नहीं, ऐसा नहीं, शर्म की बात है, चुप रहो, भगवान् न करे – शान्तं कथं दुर्जनाः पौरजानपदाः–उत्तर० १, तामेव शान्तमथवा किमिहोत्तरण –३।२६।
समस्त पद
~आत्मन्, ~चेतस्
( वि०) सौम्य, शान्तमना, धीर, स्वस्थमना,
~तोय
(वि०) जिसका पानी स्थिर हो,
~रसः
मौनभाव –दे० ऊ० शान्तम् ।
शान्त (वि०) [शम्+क्त]
प्रभावहीन किया हुआ, ठूँठा किया हुआ ।
समस्त पद
~गुण
(वि०) उपरत, मृत –नृपे शान्तगणे जाते –रा० २ ।६५।२४,
~रजस्
(वि०)
1. घल रहित
2. निरावेश ।
परिशिष्ट