शान्तिः (स्त्री०) [शम् +क्तिन्]
1. प्रशमन, निराकरण, सान्त्वना, हटाव–अध्वरविघातशान्तये –रघु० ११।१, ६२
2. धैर्य, प्रशान्तता, निःशब्दता, अमन-चैन, विश्राम–कु० ४।१७, मा० ६।१
3. वैरनिरोध –भामि० १।२५
4. विराम, निवृत्ति
5. आवेश का अभाव, मौनभाव, सभी सांसारिक भोगों के प्रति पूर्ण उदासीनता–रघु० ७।७१
6. सान्त्वना, ढाढस
7. सामञ्जस्यविधान, विरोधोपशमन
8. भूख की तृप्ति
9. प्रायश्चित्त अनुष्ठान, पाप को दूर करने के लिए तुष्टिप्रद अनुष्ठान
10. सौभाग्य, बधाई, आशीर्वाद, माङ्गलिकता
11. दोषमार्जन, कलंक से मुक्ति, परिरक्षण ।
समस्त पद
~उदम्, ~उदकम्, ~जलम्
शान्तिकर तथा प्रयादपूर्ण जल –श० ३,
~कर, ~कारिन्
(वि०) सान्त्वक, प्रशामक,
~गृहम्
विश्रामकक्ष,
~होमः
पापका निस्तारण करने के लिए यज्ञ करना– मनु० ४।१५० ।
शान्ति: (स्त्री०) [शम्+क्तिन्]
विनाश, अन्त ।
समस्त पद
~कर्मन्
पाप को दूर करने का कोई धार्मिक अनुष्ठान,
~वाचनम्
ऐसे वेद मंत्रों का सस्वर पाठ जो पाप को दूर करने वाले समझे जाते है ।
परिशिष्ट