शान्ता [शान्त+टाप्]
दशरथ की पुत्री जिसे लोमपाद ऋषि ने गोद ले लिया था तथा जो ऋष्यशृङ्ग को व्याही गई थी । दे० उत्तर० १।४, 'ऋष्यशृङ्ग' भी ।