शापः [शप्+घञ्]
1. अभिशाप, अवक्रोश, फटकार –शापेनास्तं गमितमहिमा वर्षभोग्येण भर्तुः– मेघ० १, ९२, रघु० १।७८, ५।५६, ५९, ११।१४
2. सौगन्ध, शपथोक्ति
3. दुर्वचन, मिथ्या आरोप ।
समस्त पद
~अन्तः, ~अवसानम्, ~निवृत्तिः
(स्त्री०) अभिशाप की समाप्ति, मेघ० ११०, रघु० ८।८२,
~अस्त्रः
'अभिशाप को ही जिसने अपना आयुध बनाया है' ऋषि, महात्मा –रघु० १५।३,
~उत्सर्गः
अभिशाप का उच्चारण,
~उद्धारः, ~मुक्तिः , ~मोक्षः
अभिशाप से छुटकारा,
~ग्रस्त
(वि०) अभिशाप से दबकर परिश्रम करने वाला,
~मुक्त
(वि०) अभिशाप से जिसने छुटकारा पा लिया है,
~यन्त्रित
( वि० ) अभिशाप के कारण नियन्त्रणपूर्ण ।