शिशुः [शो+कु, सन्वद्भावः, द्वित्वम्]
1. वालक, बच्चा, शिशुर्वा शिष्या वा–उत्तर० ४।११
2. किसी भी जानवर का बच्चा (बछड़ा, पिल्ला, छौना आदि) श० १।१४, ७।१४,१८
3. आठ या सोलह वर्ष से कम आयु का बालक ।
समस्त पद
~क्रन्दः, ~क्रन्दनम्
बच्चे का रोना,
~गन्धा
एक प्रकार की मल्लिका,
~पाल:
दमघोष का पुत्र तथा चेदि देश का राजा (विष्णपुराण के अनुसार यह राजा पूर्वजन्म में राक्षसों का राजा पापी हिरण्यकशिपु था जिसे नरसिंह का रूप धारण कर विष्णु ने मार गिराया था । उसके पश्चात् इसने दस सिर वाले रावण के रूप में जन्म लिया, और राम ने इसको मार डाला । फिर इसी ने दमघोष के घर जन्म लिया और विष्णु के अष्टम अवतार कृष्ण भगवान् से और भी अधिक निष्ठुरता के साथ निरन्तर द्वेष करता रहा (दे० शि० १) जब युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में यह कृष्ण से मिला तो उसे बुरा भला कहने लगा, कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से इसका सिर काट डाला । इसकी मृत्यु ही, माघकवि के प्रसिद्धकाव्य का विषय है),
°हन्
(पुं०) कृष्ण का विशेषण,
~मारः
सूंस नाम का जलजन्तु,
~वाहकः, ~वाह्यकः
जंगली बकरा ।
शिशुः [शो+कु, सन्वद्भावः, द्वित्वम्]
1. वच्चा, बाल
2. किसी भी जन्तु का बच्चा (बछड़ा, पिल्ला, बिलौटना आदि)
3. छठे वर्ष में हाथी ।
समस्त पद
~नामन्
(पुं०) ऊँट ।
परिशिष्ट