संस्कृत-शब्दकोशः

श्रुतवत् श्रुव

श्रुति

श्रुतिः (स्त्री०) [श्रु+क्तिन्]


1. सुनना –चन्द्रस्य ग्रहणमिति श्रुतेः–मुद्रा० १।७, रघु० १।२७
2. कान,–श्रुतिसुखभ्रमरस्वनगीतय:–रघु० ९।३५, श० १।१, वेणी० ३।२३
3. विवरण, अफ़वाह, समाचार, मौखिक संवाद
4. ध्वनि
5. वेद (दिव्य संदेश होने के कारण –विप० ‘स्मृति’–दे० 'वेद' के अन्तर्गत)
6. वैदिकपाठ वेदमंत्र,–इतिश्रुतेः या इति श्रुति: ‘ऐसा वेद कहता है'
7. वेदज्ञान, पुनीतज्ञान, पुण्य अधिगम
8. (संगीत में) सप्तक का प्रभाग, स्वर का चतुर्थांश या अन्तराल –शि० १।१०, १।११, (दे० तत्स्थानीय मल्लि०)
9. श्रवण नक्षत्र ।
समस्त पद
~अनुप्रासः
अनुप्रास का एक भेद–दे० काव्य० ९,
~उक्त, ~उदित
(वि०) वेदविहित,
~कट:
1. साँप
2. तपश्चर्या, प्रायश्चित्त साधना,
~कटु,
(वि०) सुनने में कड़वा
(–टुः)
कर्णकटु, अमधुर ध्वनि, (यह रचनाका एक दोष माना जाता है),
~चोदनम्, –ना
शास्त्रीय विधि, वेदविधि,
~जीविका
धर्मशास्त्र, विधिसंहिता,
~द्वैधम्
वेदविधियों का परस्पर विरोध या निष्क्रमता,
~धर
(वि०) सुननेवाला,
~निदर्शनम्
वेदों का साक्ष्य,
~पथः
कर्ण-परास –मालवि० ४।१,
~प्रसादन
(वि०) कर्णप्रिय,
~प्रामाण्यम्
वेदों की प्रामाणिकता या स्वीकृति,
~मण्डलम्
कानका बाहरी भाग,
~मूलम्
1. कान की जड़, –लपितुं किमपि श्रुतिमूले –गीत०१
2. वेद का संहितापाठ,
~मूलक
(वि०) वेद पर आधारित,
~विषयः
1. सुनने का विषय, अर्थात् ध्वनि–श० १।१
2. कर्ण परास – एतत्प्रायेण श्रुतिविषयमापतितमेव – का०
3. वेद का विषय
4. धार्मिक अध्यादेश,
~वेधः
कान बींधना,
~स्मृति
(स्त्री०) (द्वि० व०) वेद और धर्मशास्त्र ।


श्रुतिः [श्रु+क्तिन्]


1. वाणी
2. कीर्ति
3. उपयोग, लाभ
4. विद्वत्ता, पांडित्य ।
समस्त पद
~अर्थः
वैदिक अर्थसूचन,
~जातिः
नाना प्रकार के दिक्स्वर,
~दूषक
(वि०) कानों को कष्ट देने वाला,
~वेधः
कान बींधना
~शिरस्
उपनिषदें श्रुतिशिरस्सीमन्तमुक्तामणिम् –प्रताप१।१।

परिशिष्ट



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