श्वन् (पुं०) [श्वि+कनिन्, नि० (कर्तृ० श्वा, श्वानौ, श्वानः कर्म० ब० व० शुनः, स्त्री०– ‘शुनी’) कुत्ता –श्वा यदि क्रियते राजा स किं नाश्नात्युपानहम् –सुभा० – भर्तृ० २।३१, मनु० २।२०१ ।
समस्त पद
~क्रीडिन्
(पुं०) खिलारी कुत्तों को पालने वाला,
~गणः
कुत्तों का झुंड,
~गणिक:
1. शिकारी
2. कुत्तों को खिलाने वाला,
~धूर्तः
गीदड़,
~नरः
कमीना आदमी, नीच व्यक्ति,
~निशम्, ~निशा
वह रात जिसमे कुत्ते भौंकते हों,
~पच्(पुं०), ~पचः
1. अतिनीच और पतित जाति का पुरुष, जातिबहिष्कृत, चांडाल,–भामि० ४।२३
2. कुत्तों को खिलाने वाला,
~पदम्
कुत्ते का पैर,
~पाकः
जाति से बहिष्कृत, चाण्डाल –गंगा० २९,
~फलम्
खट्टा नींबू या चकोतरा,
~फल्कः
अक्रूर के पिता का नाम,
~भीरुः
गीदड़,
~यूथ्यम्
कुत्तों का झुंड,
~वृत्तिः
(स्त्री०) कुत्ते का जीवन, (बहुधा 'नौकरी' की समता इससे की जाती है)–सेवां लाघवकारिणीं कृतधियः स्थानेश्ववृत्तिं विदुः– मुद्रा० ३।१४, मनु० ४।६
2. सेवावृत्ति, सेवा– मनु० ४।४,
~व्याघ्रः
1. शिकारी जानवर
2. बाघ
3. चीता,
~हन्
(पुं०) शिकारी ।