संस्कृत-शब्दकोशः

रूप रूपण

रूपक

रूपकः [रूप्+ण्वुल्, रूप+कन् वा]


विशेष सिक्का, रुपया,
~कम्
1. शक्ल, आकृति, सूरत, (समास के अन्त में)
2. कोई वर्णन या प्रकटीकरण
3. चिह्न, चेहरा–मोहरा
4. प्रकार, जाति
5. नाटक, खेल नाट्यकृति (नाट्य रचनाओं के प्रमुख दो भेदों में से एक, दृश्य, इसके फिर आगे दस भेद हैं, इसके अतिरिक्त इसके और अवान्तर भेद हैं जो गिनती में अठारह हैं तथा 'उपरूपक' नाम से विख्यात हैं)–दृश्यं तत्राभिनेयं तद्रूपारोपात्तु रूपकम् – सा० द० २७२, २७३
6. (अलं० में) अंग्रेजी के मैटाफर (metaphor) के अनुरूप एक अलंकार जिसमें उपमेय को उपमान के ठीक समनुरूप वर्णित किया जाता है–तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययो:–काव्य० १० (विवरण के लिये देखो यही स्थान)
7. एक प्रकार का तोल ।
समस्त पद
~ताल:
संगीत में विशेष-समय,
~शब्दः
आलंकारिक या रूपकोक्ति ।



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