विपाकः [वि+पच्+घञ्]
1. खाना पकाना, भोजन बनाना
2. पाचनशक्ति
3. पकना, पक्वता, परिपक्वता, विकास (आलं० भी) –अमी पृथुस्तंबभृतः पिशङ्गतां गता विपाकेन फलस्य शालयः–कि० ४।२६, वाचां विपाको मम –भामि० ४।४२, 'मेरे परिपक्व, पूर्ण विकसित अथवा गौरवान्वित शब्द'
4. परिणाम, फल, नतीजा, पूर्वजन्म अथवा इस जन्म के कर्मों का फल,– अहो मे दारुणतरः कर्मणां विपाक:–का० ३५४, ममैव जन्मांतरपातकानां विपाकविस्फूर्जथुरप्रसह्यः –रघु० १४।६२, भर्तृ० २।९९ महावी० ५।५६,
5.
(क) अवस्थापरिवर्तन – उत्तर० ४।६,
(ख) असंभावित बात या घटनाव्यतिक्रम, भाग्य का पलटा खाना, दुःख, संकट, –उत्तर० ३।३, ४।१२
6. कठिनाई, उलझन
7, रसास्वाद, स्वाद ।
विपाकः [वि+पच्+घञ्]
कुम्हलाना, मुरझाना ।
समस्त पद
~दारुण
(वि०) परिणाम में भयंकर,
~दोषः
अग्निमांद्य, अजीर्ण ।
परिशिष्ट