विरूप (वि०) स्त्री० –‘पा’, –‘पी’) [विकृतं रूपं यस्य प्रा० ब०]
1. विरूपित, कुरूप, बदशकल, बदसूरत पञ्च० ११।४३
2. अप्राकृतिक, विकटाकार
3. विश्वरूप, विविधरूपों वाला,
~पम्
1. कुत्सित रूप, कुरूपता
2. रूप, स्वभाव या चरित्र की विभिन्नता ।
समस्त पद
~अक्ष
(वि०) भद्दी आँखों वाला– वपुर्विरूपाक्षम् कु० ५।७२,
(–क्षः)
शिव (विषम संख्या की आँखें होने के कारण)–
“दृशा दग्धं मनसिजं जीवयन्ति दृशैव याः ।
विरूपाक्षस्य जयिनीस्ताः स्तुवे वामलोचनाः ॥”
– विद्ध० १।२, कु० ६।२१,
~करणम्
1. बदसूरत बनाना
2. क्षति पहुँचाना,
~चक्षुस्
(पुं) शिव का विशेषण,
~रूप
(वि०) भद्दा, बेडौल ।