संस्कृत-शब्दकोशः

व्यर्थ व्यवकलन

व्यलीक

व्यलीक (वि०) [विशेषेण अलति –वि+अल्+कीकन्]


1. मिथ्या, झूठा
2. कुत्सित, अनभिमत, असुखद
3. जो मिथ्या न हो –शि० ५।१,
~क:
1. स्वेच्छाचारी
2. गांडू, लौण्डा,
~कम्
कोई भी अप्रिय या असुखद वस्तु, अप्रियता –इत्थं गिरः प्रियतमा इव सोऽव्यलीकाः शुश्राव सूततनयस्य तदा व्यलीकाः –शि० ५।१
2. बेचैनी का कारण, पीड़ा, शोक या रंज का कारण –सुतनु हृदयात्प्रत्यादेशव्यलीकमपैतु ते –श० ७।२४, कि० ३।१९, कु० ३।२५, रघु० ४।८७
3. दोष, अपराध, अतिक्रमण, अनुचित कार्य,– सव्यलीकमवधीरितखिन्नं प्रस्थितं सपदि कोपपदेन –कि० ९।४५, शि० ९।८५, रत्न० ३।५
4. जालसाजी, चाल, धोखा –पंच १।१२०, २४२
5. मिथ्यापन
6. व्युत्क्रम, वैपरीत्य ।



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