संस्कृत-शब्दकोशः

शय्या शरक्षेप

शर

शरः [शृ+अच्]


1. बाण, तीर–क्व च निशितनिपाता वज्रसाराः शरास्ते –श० १।१०
2. एक प्रकार का सफेद सरकंडा या घास –शरकाण्डपाण्डुगण्डस्थला –मालवि० ३।८, मुखेन सीता शरपाण्डुरेण –रघु० १४।२६, शि० ११।३०
3. कुछ जमे हुए दूध की मलाई, मलाई
4. चोट, क्षति, घाव
5. पाँच की संख्या,
~रम्
पानी ।
समस्त पद
~अग्र्यः
बढ़िया तीर,
~अभ्यासः
तीरंदाजी,
~असनम्, ~आस्यम्
धनुष, कमान –रघु० ३।५२, कू० ३।६४,
~आक्षेपः
तीरों की वर्षा,
~आरोप, ~आवापः
धनुष,
~आश्रयः
तरकस,
~आहत
(वि०)जिसके तीर लगा हो,
~ईषिका
बाण,
~इष्ट:
आम का वृक्ष,
~ओघः
बाणों का समूह, बाणवर्षा
~काण्डः
1. नरकुल की डंडी
2. बाण की लकड़ी,
~घातः
बाण से लक्ष्यवेध करना, तीरंदाजी,
~जम्
ताजा मक्खन,
~जन्मन्
(पुं०) कार्तिकेय का विशेषण–रघु० ३।२८,
~जालम्
बाणों का समूह या ढेर,
~धिः
तरकस,
पातः
बाण का छोड़ना,
~°स्थानम्
बाण का निशाना,
~पुङ्खः, ~पुङ्खा
बाण का पंखदार किनारा,
~फलम्
बाण का फल
~भङ्गः
एक ऋषि जिसके दर्शन राम ने दण्डकारण्य में किये थे – रघु० १३।४५,
~भूः
कार्तिकेय,
~मल्लः
धनुर्धर, तीरंदाज़,
~वनम्(वणम्)
नरकुलों का झुरमुट –मेघ० ४५,
°उद्भवः, °भवः
कार्तिकेय के विशेषण,
~वर्षः
बाणों की वर्षा या बौछार,
~वाणिः
1. बाण का सिरा
2. धनुर्धर
3. बाणनिर्माता
4. पदाति,
~वृष्टिः
(स्त्री०) बाणों की बौछार
~व्रातः
बाणों का समूह,
~संधानम्
बाण का निशाना लगाना–शरसंधानं नाटयति–श०१,
~संबाध
(वि०) बाणों से ढका हुआ,
~स्तम्बः
नरकुलों का गुच्छा ।



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