संस्कृत-शब्दकोशः

शिरसिज शिरस्क

शिरस्

शिरस् (नपुं०) [शृ+असुन्, निपातः]


1. सिर – शिरसा श्लाघते पूर्वं (गुणं) परं (दोषं) कण्ठे नियच्छति –सुभा०
2. खोपड़ी
3. शृङ्ग, चोटी, शिखर (पहाड़ आदि का)–हिमगौरैरचलाधिप: शिरोभिः–कि० ५।११, शि० ४।५४
4. वृक्ष की चोटी
5. किसी चीज़ का सिर या शिरोबिन्दु–शिरसि मसीपटलं वधाति दीपः–भामि० १।७४
6. कंगूरा, कलश, उच्चतम बिन्दु
7. अग्रभाग, अगला भाग, सेना का अगला भाग –श० ७।२६, उत्तर० ३।५
8. मुख्य, प्रधान, मुखिया (बहुधा समास के अन्त में) (सघोष व्यंजनों के पूर्व 'शिरस्' बदल कर समास में 'शिरो' हो जाता है) ।
समस्त पद
~अस्थि
(‘शिरोऽस्थि’) खोपड़ी,
~कपालिन्
(पुं०) मनुष्य-खोपड़ी रखने वाला संन्यासी,
~गृहम्
सबसे ऊपर का घर, चन्द्रशाला, अट्टालिका,
~ग्रहः
सिर पीड़ा, सिर दर्द,
~छेदः, ~छेदनम्
(‘शिरच्छेदः’ आदि) सिर काट देना, सिर कलम कर देना,
~तापिन्
(पुं०) हाथी,
~त्रण्, ~त्राणम्
1. लोहे की टोप –च्युतैः शिरस्त्रैश्चषकोत्तरेव –रघु० ७।४९, ६६, अपनीतशिरस्त्राणा:–४।६४
2. सिर की टोपी, पगडी,
~धरा, ~धिः
ग्रीवा, गरदन, शि० ४।५२, ५।६५,
~पीड़ा
सिर दर्द,
~फलः
नारियल का पेड़,
~भूषणम्
सिर पर पहनने का आभूषण
~मणि
1. मस्तक पर धारण करने का रत्न
2. चूड़ामणि
3. विद्वान् पुरुषों के लिए सम्मानद्योतक उपाधि,
~मर्मन्
(पुं०) सूअर,
~मालिन्
(पुं० ) शिव का विशषण,
~रत्नम्
शिरोमणि,
~रुजा
सिरदर्द,
~रुह्(पुं०), ~रुहः
(‘शिरसिरह् –रुहः’ भी) सिर के बाल –ऋतु० १।४, कु० ५।९, रघु० १५।१६,
~वर्तिन्
(वि०) मुखिया (पुं०) मुख्य, प्रधान के रूप में रहने वाला,
~वृत्तम्
मिरच,
~वेष्टः, ~वेष्टनम्
सिर पर पहनने का वस्त्र, पगड़ी,
~शूलम्
सिरदर्द,
~हारिन्
(पुं०) शिव का विशेषण ।



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