संस्कृत-शब्दकोशः

शुचा शुचियन्त्र

शुचि

शुचि (वि०) [शुच्+कि]


1. विमल, विशुद्ध, स्वच्छ – सकलहंसगुणं शुचिमानसं–कि० ५।१३
2. श्वेत, कि० १८।१८
3. उज्ज्वल, चमकदार–प्रभवति शुचिबिम्बोद्ग्राहे मणिर्न मृदां चयः –उत्तर० २।४
4. सद्गुणी, पवित्रात्मा, पुण्यात्मा, निष्पाप, निष्कलंक – अथ तु वेत्सि शुचिव्रतमात्मनः – श० ५।२७, पथ: शुचेर्दर्शयितार ईश्वराः–रघु० ३।४६, कि० ५।१३
5. पवित्रीकृत, निर्मल किया हुआ, पुनीत बनाया हुआ–रघु० १।८१, मनु० ४।७१
6. ईमानदार, खरा, निष्ठावान्, सच्चा, निश्छल–पंच० १।२००
7. सही यथार्थ,
~चिः
1. श्वेत वर्ण
2. पवित्रता, पवित्रीकरण
3. भोलापन, सद्गुण, भद्रता, खरापन
4 शुद्धता, यथार्थता
5. ब्रह्मचारी की दशा
6. पवित्रात्मा
7. ब्राह्मण
8. ग्रीष्म ऋतु–उपययौ विदधन्नवमल्लिका: शुचिरसौ चिरसौरभसंपदः – शि० ६।२२, १।५८, रघु० ३।३, कु० ५।२०
9. ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने
10. निष्ठावान् या सच्चा मित्र
11. सूर्य
12. चन्द्रमा
13. अग्नि
14. शृंगार रस
14. शुक्रग्रह
16. चित्रक वृक्ष ।
समस्त पद
~द्रुमः
पवित्र वटवृक्ष,
~मणिः
स्फटिक,
~मल्लिका
एक प्रकार की चमेली, नवमल्लिका,
~रोचिस्
(पुं०) चन्द्रमा,
~व्रत
(वि०) पुण्यात्मा, सद्गुणी,
~स्मित
(वि०) मधुर मुस्कान वाला–कु० ५।२०, रघु० ८।४८ ।



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