संस्कृत-शब्दकोशः

विप्रयोग विप्रलम्भ

विप्रलब्ध

विप्रलब्ध (भू० क० कृ०) [वि+प्र+लम् + क्त]


1. घोखा दिया गया, ठगा गया
2. निराश किया गया
3. चोट पहुंचाया गया, क्षतिग्रस्त,
~ब्धा
वह स्त्री जो अपने प्रियतम को नियत स्थान पर न पाकर निराश हो गई हो (काव्यग्रन्थों में वर्णित एक नायिका)–सा०द० ११८ पर दी गई परिभाषा –
“प्रियः कृत्वापि संकेतं यस्या नायाति संनिधिम् ।
विप्रलब्धेति सा ज्ञेया नितान्तमवमानिता ॥”



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